
आचार्य महाश्रमण
Life events
- 2010 से वर्तमान
Life
- सरदारशहर (राजस्थान), वैशाख शुक्ला 9
- झूमरमलजी दूगड़
- नेमादेवी
- सरदारशहर (राज.), वैशाख शुक्ला 14 — आचार्यश्री तुलसी की आज्ञा से, मुनि सुमेरमलजी 'लाडनूं' के द्वारा
- लाडनूं (राजस्थान), भाद्रपद शुक्ला 9
- गंगाशहर (राजस्थान), भाद्रपद शुक्ला 12 (14-09-1997) — आचार्यश्री महाप्रज्ञजी द्वारा
- सरदारशहर (राजस्थान), वैशाख शुक्ला 9 (23 मई 2010)
Chaturmas · 16
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शान्ति में तेजस्विता, मौन में तीक्ष्णता, ज्ञान में विनम्रता और सरलता में विशिष्टता — यह आचार्य महाश्रमण का संक्षिप्त परिचय है। पहले वे मुनि मुदित के नाम से जाने जाते थे। उनमें असाधारण प्रतिभा तथा सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि है।
अत्यन्त मृदुता और पूर्ण समर्पण उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ हैं। अपने असाधारण गुणों के कारण मुनि मुदित ने तेरापंथ के अनेक वरिष्ठ साधुओं का नेतृत्व किया और अट्ठाईस वर्ष की अवस्था में 'महाश्रमण' बने। व्यापक वैज्ञानिक और विवेकसम्मत दृष्टि उनकी विशेषता है।
1997 में, पैंतीस वर्ष की अवस्था में, वे युवाचार्य — आचार्य पद के उत्तराधिकारी — घोषित हुए, जो आचार्य के बाद संघ का सर्वोच्च पद है। 2010 में वे तेरापंथ के एकादश आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए। उनका जन्म 1962 में राजस्थान के सरदारशहर में हुआ।
बारह वर्ष की अवस्था में उन्होंने दीक्षा ली। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ के कुशल मार्गदर्शन में उन्होंने शिक्षा पाई और निष्ठावान शिष्य सिद्ध हुए। वे विद्वान्, लेखक, प्रभावशाली वक्ता और ध्यान-साधक हैं, और तेरापंथ के युवा संगठनों को नैतिक तथा भावनात्मक मार्गदर्शन देते हैं।