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‹ Mantra Upaay
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विघ्‍न निवारक (३)

Warding off obstacles (3)

Mantra

ॐ ह्रीं श्रीं ऐं अर्हं श्री पार्श्‍वनाथाय धरणेन्द्र-पद्मावतीसहिताय अतुलबलवीर्य-पराक्रमाय अट्टे मट्टे क्षुद्रविघट्टे क्षुद्रान् स्तंभय स्तंभय दुष्टान् चूरय चूरय शत्रून् संहारय संहारय मम वांछित कुरु कुरु स्वाहा

How many times
Once daily
How to practise
अपेक्षा होने पर ६ बार ।
Result
Disturbance is quelled

Source: Mantra — Ek Samadhan