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श्लोक 29

29

सिंहासने मणि-मयूख-शिखा-विचित्रे विभ्राजते तव वपुः कनकावदातम् । बिम्बं वियद्विलसदंशु-लता-वितानं तुङ्गोदयाद्रि-शिरसीव सहस्र-रश्मेः ॥२९॥


मणियों की किरण-शिखाओं से विचित्र सिंहासन पर स्वर्ण के समान उज्ज्वल आपका शरीर सुशोभित होता है — जैसे ऊँचे उदयाचल के शिखर पर आकाश में विलसित किरण-लताओं के वितान वाला सहस्र-रश्मि सूर्य का बिम्ब।

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