स्तोत्र
स्तोत्र, स्तुति एवं अष्टकम् — अर्थ सहित।
स्तोत्र किसी आराध्य की स्तुति में रचित पद्य है। जैन परंपरा में इनकी एक लंबी शृंखला है — भक्तामर से लेकर कल्याणमंदिर और विभिन्न आचार्यों की रचनाओं तक। अधिकांश स्तोत्र संस्कृत या प्राकृत में हैं, और उनकी रचना छंदबद्ध होती है, ताकि वे कंठस्थ रह सकें।
अष्टक आठ श्लोकों का स्तोत्र होता है; स्तुति प्रायः छोटी होती है। यहाँ तीनों रूप संकलित हैं, और प्रत्येक श्लोक के साथ उसका हिंदी अर्थ दिया गया है — क्योंकि पाठ का अभ्यास तभी पूर्ण होता है जब अर्थ भी साथ चले।
जहाँ रचयिता ज्ञात है वहाँ उनका नाम दिया गया है; जहाँ परंपरा से प्राप्त रचना है, वहाँ वैसा ही अंकित है।
- भक्तामर स्तोत्र
- “ॐ ह्रीं श्रीं” – सुख शांति मंत्र
- अन्ययोगव्यवच्छेदिका (महावीर-स्तोत्रम्)
- अयोगव्यवच्छेदिका (महावीर-स्तोत्रम्)
- करॆमि भंते! सामाइयं – सामायिक प्रतिज्ञा सूत्र
- कालु-अष्टकम्
- गौतम-कुलकं
- चौबीसी
- चौबीसी – ॐ नमः अरिहंत अतनु
- जय-अष्टकम्
- तिक्खुत्तो आयाहिणं – गुरु वंदना पाठ
- तुलसी-अष्टकम्
- तेरापंथ-प्रबोध
- नमस्कार महामंत्र
- नवग्रह निवारण पार्श्व स्तोत्र
- नीति-शतकम्
- पञ्चसूत्रम्
- परमेष्ठी वन्दना
- भिक्षु-अष्टकम्
- भिक्षु-स्मृति
- मंगल स्तोत्र – मंगलं भगवान् वीरो
- मंगल-स्तोत्र
- महाप्रज्ञ-अष्टकम्
- महावीर-अष्टकम्
- महावीराष्टकम् स्तोत्र
- महाश्रमण-अष्टकम्
- मुणिन्द मोरा
- लोगस्स पाठ – लोगस्स उज्जोयगरे
- वृहद् उपसर्गहर स्तोत्र
- शान्त सुधारस-भावना
- श्री घंटाकर्ण महावीर मंत्र-स्तोत्र
- श्री भुवाल माता जी की आरती
- श्री मंत्राधिराज स्तोत्र
- षड्दर्शन-समुच्चय:
- सङ्घ-षट्त्रिंशिका
- सिन्दूरप्रकर: