उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघणमुक्कं । विसहर—विसनिन्नासं, मंगल—कल्लाण—आवास ।।
शासन पर होने वाले उपसर्गों को दूर करने वाला पार्श्व देवता जिनके चरणों में सेवक है, कर्म—रूप सघन बादलों से जो मुक्त हैं, महाविषधर भुजंग का विष जिनके नाम से दूर होता है, मंगल और कल्याण के घर हैं, उन पार्श्व प्रभु को नमस्कार करता हूं ।