मुख्य सामग्री पर जाएँ

सहायता

यह संग्रह कैसे उपयोग करें — खोज, ऑडियो और सामग्री से जुड़े सामान्य प्रश्न। जो यहाँ न मिले, वह पूछ लीजिए।

खोजना

कोई गीतिका कैसे ढूँढें?
ऊपर के खोज-बॉक्स में गीत का नाम या उसकी कोई भी पंक्ति लिखिए — केवल पहली पंक्ति नहीं, बीच की पंक्ति से भी गीत मिल जाएगा। पूरा गीत याद न हो तो जितना याद है उतना ही लिखिए। फ़ोन पर नीचे की पट्टी में "खोज" दबाइए; कंप्यूटर पर Ctrl+K से भी खुल जाता है।
देवनागरी में टाइप नहीं कर पाते तो?
रोमन में लिखिए। "tulsi", "bhaktamar", "namokar" जैसे शब्द भी काम करते हैं — हर रचना की रोमन वर्तनी भी अनुक्रमित है।
गीत का नाम याद नहीं, केवल लय याद है — तब?
लय से भी सूची बनी हुई है। एक ही लय पर गाई जाने वाली सब रचनाएँ एक साथ मिलेंगी।लय से देखें
अकारादि क्रम से देखना हो तो?
अक्षर-क्रम की अनुक्रमणिका है — अ से ज्ञ तक, हर अक्षर का अपना पृष्ठ।अनुक्रमणिका

पढ़ना और सुनना

पृष्ठ पर "गीत क्रमांक" क्या है?
हर रचना का स्थायी नंबर। किसी को फोन पर बताना हो तो पूरा नाम बोलने के बजाय यही नंबर बता दीजिए — "गीत क्रमांक 257 खोलिए"। यह नंबर कभी बदलता नहीं। पास में कॉपी बटन भी है।
अक्षर छोटे लग रहे हैं।
ऊपर दाईं ओर सेटिंग्स (⚙ जैसा) बटन दबाइए — वहाँ अक्षरों का आकार तीन स्तरों में बदला जा सकता है। चुनाव सहेज लिया जाता है, हर बार करने की ज़रूरत नहीं।
रात में सफ़ेद स्क्रीन चुभती है।
सेटिंग्स के पास वाला गोल बटन दिन/रात बदलता है। "स्वतः" चुनने पर आपके फ़ोन की सेटिंग के अनुसार अपने आप बदलेगा।
ऑडियो चलाकर दूसरा पृष्ठ खोलूँ तो क्या रुक जाएगा?
नहीं। नीचे की पट्टी में चलता रहेगा — पृष्ठ बदलने पर भी, भाषा बदलने पर भी। बंद करना हो तो उसी पट्टी पर × दबाइए।
भक्तामर का पाठ साथ-साथ सुनना है।
भक्तामर पृष्ठ पर कई वाचकों की रिकॉर्डिंग हैं — सूची में से चुनिए। हर श्लोक के पृष्ठ पर उसी श्लोक से सुनना शुरू होता है, और कितनी बार दोहराना है यह भी चुना जा सकता है।भक्तामर
गीतिका पर वीडियो भी देख सकते हैं?
जिन रचनाओं की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, वहाँ "सुनें / देखें" खंड में वीडियो बटन है। सामान्यतः केवल ध्वनि चलती है ताकि शब्द पढ़ते रहें; वीडियो दबाने पर वही रिकॉर्डिंग दिखने भी लगती है।

सामग्री के बारे में

यह सब कहाँ से लिया गया है?
तेरापंथ परंपरा के प्रकाशित संग्रहों से। जहाँ रचनाकार का नाम ज्ञात है वहाँ नाम दिया गया है; शेष "परंपरागत" हैं। स्रोत और अनुमति की स्थिति हर पृष्ठ पर लिखी रहती है।संग्रह के बारे में
भक्तामर के 44 श्लोक ही क्यों हैं?
यहाँ श्वेतांबर पाठ है, जिसमें 44 श्लोक हैं। दिगंबर परंपरा में 48 माने जाते हैं। दोनों पाठ प्रामाणिक हैं — यह संग्रह जिस परंपरा का अनुसरण करता है, वही दिया गया है।
कोई रचना गलत छपी है या कुछ छूट गया है।
बताइए, सुधार दिया जाएगा। पाठ, अनुवाद या नाम में कोई त्रुटि दिखे तो विशेष रूप से बताइए — ये अपने आप नहीं बदले जाते।सुझाव भेजें
मेरी रचना बिना अनुमति यहाँ है।
समकालीन रचनाओं पर यह स्पष्ट लिखा रहता है और हटाने का पता दिया रहता है। रचनाकार या अधिकारी कहें तो तुरंत हटा दी जाएगी — copyright@bhaktamar.org पर लिखिए।अधिकार-सूचना

उपयोग

क्या इसका कोई शुल्क है? खाता बनाना पड़ेगा?
नहीं। पूरा संग्रह निःशुल्क है, कोई खाता नहीं, कोई विज्ञापन नहीं।
बिना इंटरनेट के चलेगा?
एक बार खोला हुआ पृष्ठ प्रायः फिर खुल जाता है, पर पूरा संग्रह बिना इंटरनेट उपलब्ध नहीं है। ऑडियो के लिए इंटरनेट आवश्यक है।
फ़ोन में ऐप की तरह लगाना है।
ब्राउज़र के मेन्यू में "होम स्क्रीन पर जोड़ें" चुनिए। फिर यह ऐप की तरह ही खुलेगा।

उत्तर नहीं मिला?

पूछ लीजिए — और कोई रचना छूट गई हो या कहीं त्रुटि दिखे तो वह भी बताइए।

hello@bhaktamar.org