साधना
मंगल, जप एवं श्रावक साधना, जैन धर्म परिचय, तेरापंथ परिचय तथा प्रेक्षा — पाठ और परिचय, विषय के अनुसार।
साधना का अर्थ है वह नियमित अभ्यास जिससे साधक अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है। जैन परंपरा में यह केवल जप या ध्यान तक सीमित नहीं है — इसमें दैनिक पाठ, सामायिक, प्रतिक्रमण, व्रत-विधि और आत्म-निरीक्षण सब सम्मिलित हैं।
यहाँ सामग्री विषय के अनुसार बाँटी गई है: नित्य पाठ एवं विधि, मंगल साधना, जप साधना, श्रावक साधना, जैन धर्म परिचय, तेरापंथ परिचय, तथा प्रेक्षा और अनुप्रेक्षा। प्रत्येक वर्ग में उससे जुड़े पाठ और उनकी विधि दी गई है।
जहाँ विधि का क्रम महत्त्वपूर्ण है, वहाँ वह क्रम से ही दिया गया है, ताकि अभ्यास करने वाला उसी क्रम में चल सके।