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लोगस्स पाठ – लोगस्स उज्जोयगरे

लोगस्स पाठ जैन धर्म की अत्यंत पूज्य और प्रभावशाली स्तुति है। इसमें चौबीस तीर्थंकर भगवानों के गुणों का स्मरण, वंदन और स्तवन किया गया है। यह पाठ हमें तीर्थंकरों के आदर्श जीवन, उनके ज्ञान, तप और करुणा की याद दिलाता है। श्रद्धापूर्वक लोगस्स का पाठ करने से मन में शांति, भक्ति और आत्मकल्याण की भावना जागृत होती है तथा मोक्षमार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

परंपरागत

1

लोगस्स उज्जोयगरे, धम्मतित्थयरे जिणे। अरहंते कित्तइस्सं, चउवीसंपि केवली।।

जो संसार को ज्ञान का प्रकाश देने वाले और धर्मतीर्थ की स्थापना करने वाले जिन हैं। मैं चौबीसों केवलज्ञान प्राप्त अरिहंत प्रभुओं की स्तुति करता हूँ।

2

उसभमजियं च वंदे, संभवमभिनंदणं च सुमइं च। पउमप्पहं सुपासं, जिणं च चंदप्पहं वंदे।।

मैं ऋषभदेव, अजितनाथ, संभवनाथ, अभिनंदननाथ और सुमतिनाथ प्रभु को वंदन करता हूँ। मैं पद्मप्रभु, सुपार्श्वनाथ और चंद्रप्रभु भगवान को नमस्कार करता हूँ।

3

सुविहिं च पुप्फदंतं, सीअल सिज्जंस वासुपुज्जं च। विमलमणंतं च जिणं, धम्मं संतिं च वंदामि।।

मैं पुष्पदंत (सुविधिनाथ), शीतलनाथ, श्रेयांसनाथ और वासुपूज्य प्रभु को वंदन करता हूँ। मैं विमलनाथ, अनंतनाथ, धर्मनाथ और शांतिनाथ भगवान को नमस्कार करता हूँ।

4

कुंथं अरं च मल्लिं, वंदे मुणिसुव्वयं नमिजिणं च। वंदामि रिट्ठनेमिं, पासं तह वद्धमाणं च।।

मैं कुंथुनाथ, अरनाथ, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रतनाथ और नमिनाथ प्रभु को वंदन करता हूँ। मैं नेमिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी को नमस्कार करता हूँ।

5

एवं मए अभिथुआ, विहुय-रयमला पहीणजर-मरणा। चउवीसंपि जिणवरा, तित्थयरा में पसीयंतु।।

मैंने उन प्रभुओं की स्तुति की है जिन्होंने राग-द्वेष को जीत लिया और जन्म-मरण से मुक्त हो गए। वे चौबीसों तीर्थंकर प्रभु मुझ पर प्रसन्न हों।

6

कित्तिय वंदिय मए, जेए लोगस्स उत्तमा सिद्धा। आरोग्ग-बोहिलाभं, समाहिवरमुत्तमं दिंतु।।

जिन श्रेष्ठ सिद्धों की मैंने स्तुति और वंदना की है। वे मुझे आरोग्य, सम्यक् ज्ञान और उत्तम समाधि प्रदान करें।

7

चंदेसु निम्मलयरा, आइच्चेसु अहियं पयासयरा। सागरवरगंभीरा, सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु।।

वे चंद्रमा से अधिक निर्मल और सूर्य से अधिक प्रकाश देने वाले हैं। वे महासागर के समान गंभीर सिद्ध मुझे मोक्ष का मार्ग दिखाएँ। इस पाठ का संदेश है कि तीर्थंकरों और सिद्धों के गुणों का स्मरण करके जीवन को पवित्र बनाया जाए। उनकी कृपा से सम्यक् ज्ञान, आरोग्य, शांति और आत्मोन्नति प्राप्त हो। 🙏जय जिनेंद्र🙏