श्रेयस्करः सुखकरः सुमतिप्रदाता, सर्वप्रियो हितकरः सुसमाधिदाता । सत्यव्रती श्रमरतिश्च महातपस्वी, पूतः प्रभास्वर—महाश्रमणः पुनातु ।।
जो श्रेयस्कर हैं, सुख के स्रष्टा हैं, सुमति (श्रेष्ठ मति) प्रदाता हैं, सबके प्रिय हैं, हित सम्पादित करने वाले हैं, समस्याओं के सम्यक् समाधायक हैं, सत्य जिनका व्रत है, श्रम जिन्हें प्रिय है, जो महातपस्वी हैं, ऐसे पवित्र एवं प्रभास्वर व्यक्तित्व के धारक आचार्यश्री महाश्रमण हमें पवित्र करें ।