ॐ ह्रीं श्रीं अ-सि-आ-उ-सा, सर्व-विघ्न रोगोपद्रव विनाशनाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
“ॐ ह्रीं श्रीं” ये पवित्र बीज मंत्र हैं, जो दिव्य ऊर्जा, शुद्धता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं। “अ-सि-आ-उ-सा” जैन धर्म के पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) का संकेत है। सभी बाधाओं (विघ्न), रोगों और कष्टों के नाश के लिए। मेरे ग्रहों/जीवन में शांति स्थापित करो, कृपया इसे पूर्ण करो (समर्पण)। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏