ॐ भु श्री भुवाल माता, मैया श्री कुलदेवी माता। मैयाजी को निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री।।
हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 हे माँ, आप हमारी कुलदेवी हैं। हम आपको दिन-रात याद करते हैं। हरि, ब्रह्मा और शिव भी आपको मानते हैं।