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श्री भुवाल माता जी की आरती

छाजेड़ परिवार की कुलदेवी श्री भुवाल माता जी का प्राचीन स्थान बाड़मेर जिले के खेड़ नगर में था। मुस्लिम आक्रमणों के समय खेड़ नगर नष्ट हो गया और छाजेड़ परिवार विभिन्न स्थानों पर बस गया। इसके बाद माताजी ने जोधपुर जिले के बिरामी गांव में जवाहरजी पुरोहित को दर्शन दिए और पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। उनके खेत में माताजी की स्थापना हुई और पूजा शुरू हुई। कई वर्षों तक यह स्थान सीमित रूप से ही प्रसिद्ध रहा। 20वीं सदी में पुणे की सौ. सुशीला बाई छाजेड़ को दैवी संकेत प्राप्त हुए, जिसके बाद मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया। पुरोहित परिवार ने भूमि दी और छाजेड़ समाज के सहयोग से 1976 में बिरामी में भव्य मंदिर बनकर प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई।

परंपरागत

1

ॐ भु श्री भुवाल माता, मैया श्री कुलदेवी माता। मैयाजी को निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 हे माँ, आप हमारी कुलदेवी हैं। हम आपको दिन-रात याद करते हैं। हरि, ब्रह्मा और शिव भी आपको मानते हैं।

2

ॐ भु श्री भुवाल माता। माँग सिंदूर विराजत, टीको कुमकुम को। उज्ज्वल से दो नैना, चन्द्र-वदन नीको।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 आपकी माँग में सिंदूर सजा है। माथे पर कुमकुम का तिलक है। आपकी दोनों आँखें चमक रही हैं। आपका चेहरा चाँद जैसा सुंदर है।

3

ॐ भु श्री भुवाल माता। कानन कुण्डल शोभित, नासा गज मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 आपके कानों में कुण्डल सुन्दर लगते हैं। आपकी नाक में मोती है। आप करोड़ों चाँद और सूरज जैसी चमकती हैं, आपकी रोशनी बहुत तेज है।

4

ॐ भु श्री भुवाल माता। कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रत्न-पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजे ॐ भु श्री भुवाल माता। हंसा वाहन राजत, कमल त्रिशूल धारी। सुर-नर मुनिजन सेवत, ताके दुख हारी।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 आपका शरीर सोने जैसा है। आप लाल कपड़े पहने हैं। आपके गले में फूल और रत्नों की माला है, जो गले में सजी है। आप हंस पर बैठी हैं। आपके हाथ में कमल और त्रिशूल है। देवता, मनुष्य और मुनि आपकी सेवा करते हैं, आप उनके दुख दूर करती हैं।

5

ॐ भु श्री भुवाल माता। शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती। धूम्रविलोचन नाशक, निशदिन सुखदाती।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 आपने शुम्भ और निशुम्भ को मारा, आपने महिषासुर को भी मारा, आपने धूम्रविलोचन को नष्ट किया, आप दिन-रात सुख देती हैं।

6

ॐ भु श्री भुवाल माता। चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू। बाजत ताल मृदंगा, और बाजत डमरू।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 चौंसठ योगिनियाँ आपका गुण गाती हैं, भैरव नृत्य करते हैं, मृदंग की धुन बजती है, और डमरू भी बजता है।

7

ॐ भु श्री भुवाल माता। भुजा चार अति शोभित, माला पुस्तक धारी। मन-इच्छा फल पावत, सेवत नर-नारी।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 आपकी चार भुजाएँ सुन्दर हैं, आप माला और पुस्तक पकड़े हैं, लोगों की इच्छाएँ पूरी होती हैं, जो स्त्री-पुरुष आपकी सेवा करते हैं।

8

ॐ भु श्री भुवाल माता। कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्री-माल कंठ में राजत, कोटि रत्न ज्योति।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 आपके सामने सोने का थाल है, जिसमें अगर और कपूर की बाती है, आपके गले में सुंदर माला है, जो बहुत तेज चमकती है।

9

ॐ भु श्री भुवाल माता। माँ भुवाल की आरती, जो कोई नर गावे। वाँरे लक्ष्मी घर आवे, सुख-सम्पत्ति फल पावे।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 जो कोई इसे गाता है, उसके घर लक्ष्मी आती है, उसे सुख और धन मिलता है।

10

ॐ भु श्री भुवाल माता। वाँरे आनन्द हो जावे, वाँरा पाप परा मिट जावे। वाँरे कार्य बन जावे, भजत छाजेड परिवार, इच्छाफल पावे।।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏 उसे आनंद मिलता है, उसके पाप मिट जाते हैं, उसके काम पूरे हो जाते हैं, भक्ति करने वाला छाजेड़ परिवार मनचाहा फल पाता है।

11

ॐ भु श्री भुवाल माता।

हे भुवाल माता, आपको प्रणाम है। छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति का इतिहास राठौड़ वंश और कुलदेवी श्री भुवाल माता जी की कृपा से जुड़ा है। कन्नौज के राठौड़ राजवंश से राव सियाजी के वंशज राव रामसिंह बाड़मेर के खेड़ नगर के शासक थे। उस समय नगरसेठ सोमाशाह भुवाल माता के महान भक्त थे। एक अवसर पर पाटण में विवाह के समय राव रामसिंह आर्थिक कठिनाई में थे, तब उन्होंने भुवाल माता से प्रार्थना की। माता की कृपा से सेठ सोमाशाह को स्वप्न हुआ और उन्होंने राव रामसिंह को धन देकर उनकी प्रतिष्ठा बचाई। बाद में माता के आदेश से राव रामसिंह ने अपना पुत्र “काजल” सेठ सोमाशाह को गोद दे दिया। काजल की संतानों ने भुवाल माता की भक्ति की। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें नया “छाजेड़” गोत्र प्रदान किया, जो आज छाजेड़ समाज की पहचान है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, आचार्य श्री जिनचन्द्रसूरि जी के उपदेश से राव काजल ने जैन धर्म अपनाया और उन्हें “छाजेड़” गोत्र प्राप्त हुआ। इस प्रकार छाजेड़ गोत्र की उत्पत्ति में दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं, परंतु सभी में भुवाल माता जी की कृपा का विशेष महत्व माना जाता है। 🙏 जय जिनेंद्र 🙏