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आधा है चन्द्रमा रात आधी

आनन्द में, परमानन्द में,

Ananda Men, Parmananda Men,

आधा है चन्द्रमा रात आधी

गीत क्रमांक210

आनन्द में, परमानन्द में, — Lyrics

आनन्द में, परमानन्द में, रमता रहूं नित आनन्द में ।। ।स्थायीपद ।।

नाना द्वन्द्वों से जगत् भरा है, पग—पग रहता यहां खतरा है, सुख का खजाना है निर्द्वन्द्व में ।।1।।

सबके सुख में सदा सुख मानूं, आत्म तुल्य मैं सबको जानूं, है सार अनपार इस छन्द में ।।2।।

बाह्य भावों में मन क्यों लुभाता, निज भावों को क्यों है भुलाता, खोया क्यों है रूप—रस—गन्ध में ।।3।।

अन्तर्यात्रा करूं मैं सजग हो, बढूं सत्पथ पर ‘विजय’ अडिग हो, सोचूं नित आत्मा के संबन्ध में ।।4।।

Roman Transliteration

ananda men, parmananda men, ramta rahun nit ananda men .. .sthayipad ..

nana dvandvon se jagat bhara hai, pag—pag rahta yahan khatra hai, sukh ka khajana hai nirdvandva men ..1..

sabke sukh men sada sukh manun, atma tulya main sabko janun, hai sar anapar is chhanda men ..2..

bahya bhavon men man kyon lubhata, nij bhavon ko kyon hai bhulata, khoya kyon hai rup—ras—gandha men ..3..

antaryatra karun main sajag ho, badhun satpath par ‘vijay’ adig ho, sochun nit atma ke sambandha men ..4..

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