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आभो धरर धरर धर्रावे

आपां गण रो गौरव गावां, गणवेदी पर प्राण चढावां

Apan Gan Ro Gaurav Gavan, Ganvedi Par Pran Chadhavan

साध्वी कनकश्री जी · आभो धरर धरर धर्रावे

गीत क्रमांक2930

आपां गण रो गौरव गावां, गणवेदी पर प्राण चढावां — Lyrics

आपां गण रो गौरव गावां, गणवेदी पर प्राण चढावां, दिवला श्रद्धा रा उजलावां। हो च्यारूं कूंटा पसरयो च्यानणो, मोती निपजावां रे।।

देख्यो सिंह रो सपनो दीपां, सदा शेर ज्यूं गूंज्या, थांरी सत्य-क्रांति रै आगै, खड्या विरोधी धूज्या। झुकग्या सहज्यां ही चरणां में, बदल्यो जहर सुधा झरणां में, मन रो कलुष मिटावां रे।।

त्याग-तपस्या रै पाणी स्यूं, गण री नींवां सींची, अनुशासन री मर्यादा री, लोह लकीरां खींची। तोड़ी जो आ लक्ष्मण रेखा, बांनै जड़ स्यूं मिटता देखां, के के नाम गिणावां रे ।।

अहंकार-ममकार विसर्जन, तेरापंथ रा पाया, पदलोलुपता शिष्य प्रथा रा, झंझट सकल मिटाया। चाहे पढ्या-लिख्या कम ज्यादा, सब स्यूं ऊपर है मर्यादा, साक्षी है घटनावां रै।।

एक-एक स्यूं बढ़कर गण में, हुआ तपस्वी संत, आकर्षण रो केन्द्र बण्यो, तेजस्वी तेरापंथ। तुलसी युग री महिमा न्यारी, खिलगी गण वन री फुलवारी, सतयुग-सी रचनावां रे।।

  1. 1.Aapa Gan Ro Gaurav Gava, Ganvedi Par Praan Chadhava
  2. 2.यह भजन तेरापंथ धर्मसंघ की महिमा और मर्यादा का सुंदर वर्णन करता है। इसमें त्याग, तपस्या, अनुशासन और गुरु-परंपरा की महानता को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। भजन में बताया गया है कि धर्मसंघ की मर्यादा और साधु-संतों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। श्रद्धा और समर्पण के भाव से लिखा यह भजन धर्म के प्रति प्रेम और गौरव की भावना जगाता है।

Roman Transliteration

apan gan ro gaurav gavan, ganvedi par pran chadhavan, divla shraddha ra ujalavan. ho chyarun kunta pasaryo chyanno, moti nipjavan re..

dekhyo sinh ro sapno dipan, sada sher jyun gunjya, thanri satya-kranti rai agai, khadya virodhi dhujya. jhukagya sahajyan hi charnan men, badalyo jahar sudha jharnan men, man ro kalush mitavan re..

tyag-tapasya rai pani syun, gan ri ninvan sinchi, anushasan ri maryada ri, loh lakiran khinchi. todi jo a lakshman rekha, bannai jad syun mitta dekhan, ke ke nam ginavan re ..

ahankar-mamkar visarjan, Terapanth ra paya, padlolupata shishya pratha ra, jhanjhat sakal mitaya. chahe padhya-likhya kam jyada, sab syun upar hai maryada, sakshi hai ghatnavan rai..

ek-ek syun badhakar gan men, hua tapasvi sant, akarshan ro kendra banyo, tejasvi terapanth. Tulsi yug ri mahima nyari, khilgi gan van ri phulvari, satyug-si rachnavan re..

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