मुख्य सामग्री पर जाएँ
प्रज्ञा के दीप जलेंगें

भीखण री मूरत भावै, जपतां मनड़ो हरसावै

Bhikhan Ri Murat Bhavai, Japtan Mando Harsavai

साध्वी राजीमती जी · प्रज्ञा के दीप जलेंगें

गीत क्रमांक2939

भीखण री मूरत भावै, जपतां मनड़ो हरसावै — Lyrics

भीखण री मूरत भावै, जपतां मनड़ो हरसावै, प्राणां स्यूं लागै प्यारो सांवरो, हो म्हांनै! प्राणां स्यूं लागै प्यारो सांवरो।।

सोनो सोटंच चमकतो, बेहद अरुणाई हो, कुन्दन सो बदन दमकतो, जागी तरुणाई हो। बाबैरी हुई कसौटी, खाई कद ताती रोटी।।

पूरो करस्यां सब मिलजुल, बाबै रो सपनो हो, संत फकीरां रै ईं युग में, होवै कुण अपणो हो। तप री चिनगारी भारी, सारी विपदावां हारी।।

कण-कण में बोल रही है, थांरी कुर्बाण्यां हो, छतरी में मंडी पड़ी है, कितनी सहनाण्यां हो। भिक्षु री बोध कहाण्यां, कष्टां री अमिट निशाण्यां।।

माटी रो मोल चुकावण, तपस्या स्वीकारी हो, सोयो भगवान जगावण, समता हद धारी हो। जयवन्तो अपणो शासण, महाप्रज्ञ रो दीपै आसन।।

  1. 1.Bhikhan Ri Murat Bhave, Japta Mando Harsave
  2. 2.यह सुंदर भजन साध्वी राजीमती जी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य भिक्षु की पावन मूरत, उनके तप, त्याग और आदर्शों का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। भजन में बताया गया है कि आचार्य भिक्षु का जीवन तपस्या, समता और सत्य का प्रतीक है। उनकी प्रेरणा से अनेक लोगों के जीवन में धर्म का प्रकाश फैला।

Roman Transliteration

Bhikhan ri murat bhavai, japtan mando harsavai, pranan syun lagai pyaro sanvro, ho mhannai! pranan syun lagai pyaro sanvro..

sono sotanch chamakto, behad arunai ho, kundan so badan damakto, jagi tarunai ho. babairi hui kasauti, khai kad tati roti..

puro karasyan sab miljul, babai ro sapno ho, sant phakiran rai in yug men, hovai kun apano ho. tap ri chingari bhari, sari vipdavan hari..

kan-kan men bol rahi hai, thanri kurbanyan ho, chhatri men mandi padi hai, kitni sahnanyan ho. Bhikshu ri bodh kahanyan, kashtan ri amit nishanyan..

mati ro mol chukavan, tapasya svikari ho, soyo Bhagwan jagavan, samta had dhari ho. jayavanto apano shasan, Mahapragya ro dipai asan..

← लय: प्रज्ञा के दीप जलेंगें← अनुक्रमणिका