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बादळियो

भोर-भोर उठ कर प्रभू नै सुमरलै

Bhor-Bhor Uth Kar Prabhu Nai Sumarlai

साध्वी जतनकुमारीजी · बादळियो

गीत क्रमांक2947

भोर-भोर उठ कर प्रभू नै सुमरलै — Lyrics

भोर-भोर उठ कर प्रभू भोर-भोर उठ कर प्रभू नै सुमरलै, भव-जल तूं तर ज्यावैला ओ मनवा। प्रभू नाम च्यांनणिये स्यूं आंगणियै नै भरलै, अंधियारो मिट ज्यावैला, ओ मनवा।।

ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन है, सुमति, पद्म, सुपार्श्व जग वंदन है। बंधन सब कट ज्यावैला, ओ मनवा।।

चन्द्रप्रभु, सुविधि, शीतल, श्रेयांस है, वासुपुज्य, विमल, अनन्त गुण-राश है। आनन्दमय दिन ज्यावैला, ओ मनवा।।

धर्म, शांति, कुन्थु, अर, मल्ली भगवान है, मुनिसुव्रत, नमि, नेमि, पारस, वर्धमान है। सुख सम्पति बढ़ ज्यावैला, ओ मनवा।।

इग्यारह है गणधर बीस विहरमाण है, सोलह सतियां रो नाम करै कल्याण है। पावन तूं बण ज्यावैला, ओ मनवा।।

भिक्षु, भारीमाल, राय, जय, मघराज है, माणिक, डालिम, कालू, तुलसी शासन सिरताज है। महाप्रज्ञ मन भावैला, ओ मनवा। ‘जतन’ काम बण ज्यावैला, ओ मनवा।।

  1. 1.Bhor-Bhor Uth Kar Prabhu Ne Sumarle
  2. 2.यह भक्ति-भरा भजन साध्वी जतनकुमारीजी द्वारा रचित है। इसमें प्रातःकाल उठकर प्रभु का स्मरण करने की प्रेरणा दी गई है। भजन में चौबीस तीर्थंकरों, गणधरों, सतियों तथा आचार्य परम्परा का गुणगान किया गया है। संदेश यह है कि प्रभु नाम का स्मरण जीवन के अज्ञान और दुःख को दूर कर आत्मा को शुद्ध, पावन और आनंदमय बनाता है।

Roman Transliteration

bhor-bhor uth kar prabhu bhor-bhor uth kar prabhu nai sumarlai, bhav-jal tun tar jyavaila o manva. prabhu nam chyannniye syun anganiyai nai bharlai, andhiyaro mit jyavaila, o manva..

Rishabh, ajit, sambhav, abhinandan hai, sumti, padma, suparshva jag vandan hai. bandhan sab kat jyavaila, o manva..

chandraprabhu, suvidhi, shital, shreyans hai, vasupujya, vimal, ananta gun-rash hai. anandamay din jyavaila, o manva..

Dharm, shanti, kunthu, ar, malli Bhagwan hai, munisuvrat, nami, nemi, paras, vardhaman hai. sukh sampati badh jyavaila, o manva..

igyarah hai ganadhar bis viharman hai, solah satiyan ro nam karai kalyan hai. pavan tun ban jyavaila, o manva..

Bhikshu, bharimal, ray, jay, maghraj hai, manik, dalim, Kalu, Tulsi shasan sirtaj hai. Mahapragya man bhavaila, o manva. ‘jatan’ kam ban jyavaila, o manva..

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