मुख्य सामग्री पर जाएँ
तूं मनै भगवान्‌ इक वरदान आपी दें

ज्योति के सागर! तिमिर अज्ञान का हरदो,

Jyoti Ke Sagar! Timir Ajnan Ka Hardo,

तूं मनै भगवान्‌ इक वरदान आपी दें

गीत क्रमांक1203

ज्योति के सागर! तिमिर अज्ञान का हरदो, — Lyrics

ज्योति के सागर! तिमिर अज्ञान का हरदो, हम बढ़ें सन्मार्ग पर गुरुदेव! यह वर दो।।

महातपस्वी महाश्रमण का नाम नित भाये, शान्त रस निर्झर बहे आनन्द घन छाए।।1।।

चेतना में ज्ञान की नित लौ जले ऐसी, आत्म निष्ठा जाग जाए देव! तुम जैसी।।१।।

वीतरागी मुख छवि मन को लुभाती है, सहजता, ऋजुता, सरसता को जगाती है।।3।।

कल्पतरु बन तुम सदा फलते रहो भगवन्‌! हर पलक सद्भावना भाते यही जन-जन।।4।।

अप्रमादी बन समय उपयोग हम करलें, प्राप्त कर निज साध्य जीवन में 'विजय' वरलें।।5।।

Roman Transliteration

jyoti ke sagar! timir ajnan ka hardo, ham badhen sanmarga par Gurudev! yah var do..

mahatapasvi Mahashraman ka nam nit bhaye, shanta ras nirjhar bahe ananda ghan chhae..1..

chetna men jnan ki nit lau jale aisi, atma nishtha jag jae Dev! tum jaisi..1..

vitragi mukh chhavi man ko lubhati hai, sahajta, rijuta, sarasta ko jagati hai..3..

kalpatru ban tum sada phalte raho bhagavan! har palak sadbhavna bhate yahi jan-jan..4..

apramadi ban samay upayog ham karlen, prapta kar nij sadhya jivan men 'vijay' varlen..5..

← लय: तूं मनै भगवान्‌ इक वरदान आपी दें← अनुक्रमणिका