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लय: है प्रीत जहां की रीत सदा
Hai Prit Jahan Ki Rit Sada
इस लय पर 4 रचनाएँ।
आंगन में पावन तुलसी ज्यों
Angan Men Pavan Tulsi Jyon
नमस्कार उन सन्त जनों को, जो जीना सिखलाते हैं
Namaskar Un Santa Janon Ko, Jo Jina Sikhlate Hain
मां की ममता हृदय विशाल
Man Ki Mamta Hriday Vishal
सरस्वती की ओ संतानों! वसुधा तल के ओ प्रहरी!
Saraswati Ki O Santanon! Vasudha Tal Ke O Prahri!