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बजाए जा तू प्यारे हनुमान चुटकी

[२८]

[28]

बजाए जा तू प्यारे हनुमान चुटकी

गीत क्रमांक1778

[२८] — Lyrics

[२८] बन्दे! ज्ञान पंचामृत की ले ले गुटकी, बजाए जा तू मीठी सतसंग चुटकी। तेरे जीवन की ये नैया! मझधार अटकी, बजाए जा तू मीठी सतसंग चुटकी।।

जागी पुनवानी नर देही है मिली रे, जड़ जड़ता की अब तक न हिली रे। देख माया की, गले में जंजीर लटकी।।

देव, गुरु, धर्म की पहचान है नहीं रे, त्याग और भोग का पथ एक है नहीं रे। मन छोड़ दे, तू आदत खटपट की।।

तेरा मेरा छोड़, लौ प्रेम की लगा रे, अन्तर पट खोल सोई चेतना जगा रे। जागे वे ही पाए, कीमत चटपट की।।

अपने भीतर झांक स्रोत सुख का बहे रे, बनता है महान जो समता में रहे रे। थोड़ी कर ले 'कनक' इन्तजार तट की।।

Roman Transliteration

[28] bande! jnan panchamrit ki le le gutki, bajae ja tu mithi satasang chutki. tere jivan ki ye naiya! majhdhar ataki, bajae ja tu mithi satasang chutki..

jagi punvani nar dehi hai mili re, jad jadta ki ab tak n hili re. dekh maya ki, gale men janjir latki..

Dev, Guru, Dharm ki pahchan hai nahin re, tyag aur bhog ka path ek hai nahin re. man chhod de, tu adat khatapat ki..

tera mera chhod, lau prem ki laga re, antar pat khol soi chetna jaga re. jage ve hi pae, kimat chatapat ki..

apane bhitar jhank srot sukh ka bahe re, banta hai mahan jo samta men rahe re. thodi kar le 'kanak' intajar tat ki..

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