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म्हारे आंगणिये में तुलसीगणी

सत्य को पहचानो

Satya Ko Pahchano

म्हारे आंगणिये में तुलसीगणी

गीत क्रमांक2506

सत्य को पहचानो — Lyrics

सत्य को पहचानो

तुम सही सत्य को पहचानो, मत अपनी ही अपनी तानो,

नकली भी असली-सा लगता, जेब तक पूरा बोध न जगता, अन्तर्मति से गहरा छानो।

खोटा सिक्का रोज सताता, असली को वह पहुंच न पाता, तुम पूंछ न पकड़ो दीवानों,

करते रहना सतत्‌ कसौटी, सत्य किसी की है न बपौती, आग्रह तज परम सत्य जानो।

रागी द्वेषी और आग्रही, मूढ़ जान सकता है न सही, मुनि 'मोहन' खोज-खोज मानो।

Roman Transliteration

satya ko pahchano

tum sahi satya ko pahchano, mat apani hi apani tano,

nakli bhi asali-sa lagta, jeb tak pura bodh n jagta, antarmati se gahra chhano.

khota sikka roj satata, asali ko vah pahunch n pata, tum punchh n pakdo divanon,

karte rahna satat kasauti, satya kisi ki hai n bapauti, agrah taj param satya jano.

ragi dveshi aur agrahi, mudh jan sakta hai n sahi, Muni 'mohan' khoj-khoj mano.

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