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खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़ जाते हो

तमाशा लग रहा मुझको जगत मानो मदारी का,

Tamasha Lag Raha Mujhko Jagat Mano Madari Ka,

खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़ जाते हो

गीत क्रमांक2652

तमाशा लग रहा मुझको जगत मानो मदारी का, — Lyrics

तमाशा लग रहा मुझको जगत मानो मदारी का, है सपना यों मुझे आभास होता यह भिखारी का।।

अनेकों देखने इसको इकट्ठे हैं यहां होते, मनोहर रंग रूपों में चित्त सबके यहां खोते, यह आकर्षण क्षणिक रहता अन्त पड़ता यही फीका।।

कहीं खुशियां कहीं गम है अनेकों दृश्य हैं मिलते, कहीं पतझड़ कहीं सरसब्ज उपवन है यहां खिलते, फसा संसार है इसमें जाल ज्यों यह शिकारी का।।

ये प्राणी पी रहे उन्मत्त होकर मोह की हाला, तभी तो याद कब आती 'विजय' भगवान्‌ की माला, ज्ञान की लौ जले भीतर, अन्त आये खुमारी का।।

Roman Transliteration

tamasha lag raha mujhko jagat mano madari ka, hai sapna yon mujhe abhas hota yah bhikhari ka..

anekon dekhne isako ikatthe hain yahan hote, manohar rang rupon men chitta sabke yahan khote, yah akarshan kshanik rahta anta padta yahi phika..

kahin khushiyan kahin gam hai anekon drishya hain milte, kahin patajhad kahin sarasabja upavan hai yahan khilte, phasa sansar hai isamen jal jyon yah shikari ka..

ye prani pi rahe unmatta hokar moh ki hala, tabhi to yad kab ati 'vijay' bhagvan ki mala, jnan ki lau jale bhitar, anta aye khumari ka..

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