मुख्य सामग्री पर जाएँ
‹ मंत्र उपाय
172 / 367

विघ्‍न-बाधा निवारक (१)

मंत्र

उदधि अगन अरि विष तणो सकल विघ्‍न परिहारी हो सत्यशील प्रभावे जिन कह्यो दशमां अंग मझारी हो तिमज भजन तंत सारी हो परम मंत्र समधारी हो अ, भी, रा, शि, को उदारी हो

मंत्र संख्या
१ माला
परिणाम
अग्‍नि, जल और विष से रक्षा होती है