‹ मंत्र उपाय
उदर-चिकित्सा (२)
नास्तं कदाचिदुपयासि न राहुगम्यः स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्जगन्ति नाम्भोधरोदर - निरुद्धमहाप्रभावः सूर्यातिशायिमहिमासि मुनीन्द्र ! लोके
- प्रतिदिन १ माला
- उदर-पीड़ा के समय मंत्र से पानी को अभिमंत्रित करें
- उदर-रोग समाप्त होता है । शारीरिक पीड़ा को कम करता है