‹ मंत्र उपाय
दृष्टिज्वर का विलय
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कलिकुण्डस्वामिनि ! अतुल-बलवीर्यपराक्रमा (अमुकस्य) दाह ज्वर उपशांतिं कुरु कुरु आत्मविद्या रक्ष रक्ष परविद्यां छिन्द छिन्द भिन्द भिन्द श्रीं ह्रीं हं फट् स्वाहा
- २१ बार मंत्र का उच्चारण कर झाड़ा दें
- दृष्टिज्वर समाप्त होता है