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‹ प्रश्नोत्तर

व्यवहार राशि/अव्यवहार राशि पुच्छा

  1. प्रश्न 1. संसारी जीव के दो प्रकार हैं—व्यवहार राशि, अव्यवहार राशि। व्यवहार राशि से क्या तात्पर्य है?

    व्यवहार शब्द दो अर्थों में प्रयुक्त होता है। व्यवहार का एक अर्थ है—उपयोग। जो जीव हमारे व्यवहार में यानी उपयोग में आते हैं वे व्यवहार राशि के जीव हैं। जैसे—पृथ्वी, पानी, अग्नि, वायु, वनस्पति आदि के जीव। व्यवहार का दूसरा अर्थ है—भेद। जो जीव अनेक भेदों में विभक्त हैं वे व्यवहार राशि के जीव हैं। जैसे—एक इन्द्रियवाले जीव, दो इन्द्रियवाले जीव, तीन इन्द्रियवाले जीव आदि। सिद्ध भी व्यवहार राशि में ही आते हैं।

  2. प्रश्न 2. अव्यवहार राशि से क्या तात्पर्य है?

    जिन जीवों में किसी प्रकार का विभाग नहीं होता और जिनका हमारे लिए कोई उपयोग भी नहीं होता, वे अव्यवहार राशि के जीव हैं। अव्यवहार राशि में एक शरीर में अनन्तजीव होते हैं। इस राशि में होने वाले जीवों की अवगाहना, स्थिति, आहार, उच्छ्वास, नि:श्वास आदि में कोई अन्तर नहीं होता। इन जीवों में जन्म और मृत्यु भी साथ-साथ घटित होते हैं। इनका आयुष्य बहुत छोटा होता है। एक श्वासोच्छ्वास अर्थात्‌ नाड़ी के एक स्पंदन जितने समय में ये जीव सत्रह बार जन्म लेकर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। ये ऐसे जीव हैं जो अनादिकाल से इसी वर्ग में जन्म-मरण करते रहते हैं। इन जीवों को इस वर्ग से जब तक बाहर निकलने का अवसर नहीं मिलता ये अव्यवहार राशि के जीव कहलाते हैं।

  3. प्रश्न 3. अव्यवहार राशि में किस काय के जीव आते हैं?

    इस राशि में साधारण वनस्पति के जीव आते हैं। साधारण वनस्पति अर्थात्‌ एक शरीर में अनन्त जीव। इन्हें निगोद के जीव भी कहते हैं।

  4. प्रश्न 4. निगोद के जीव दो प्रकार के होते हैं—सूक्ष्म और बादर। क्या अव्यवहार राशि में ये दोनों ही प्रकार के निगोद जीव आते हैं?

    अव्यवहार राशि में केवल सूक्ष्म जीव ही आते हैं। इन जीवों के शरीर चक्षु का विषय नहीं हैं। ये समूचे लोक में परिव्याप्त हैं। लोक का ऐसा कोई भी भाग नहीं है जहां सूक्ष्म निगोद के जीव न हों। बादर निगोद के जीव पांच प्रकार की काई, कन्दमूल आदि के रूप में होते हैं। इनका शरीर हमारी दृष्टि का विषय है।

  5. प्रश्न 5. क्या व्यवहार राशि में आने के बाद जीव पुन: अव्यवहार राशि में जा सकता है?

    नहीं। अव्यवहार राशि से जीवों का निर्यात तो हो सकता है पर उसमें आयात नहीं हो सकता।

  6. प्रश्न 6. क्या कभी ऐसा समय आ सकता है जब व्यवहार राशि के सब जीव मुक्त हो जाएंगे और संसार व्यवहार राशि के जीवों से शून्य हो जाएगा?

    नहीं। यह एक ऐसी स्वत: संचालित प्रक्रिया है कि व्यवहार राशि से जितने जीव मुक्त होंगे, उतने ही जीव अव्यवहार राशि से व्यवहार राशि में आ जाएंगे। यह बात भले ही किसी तर्क से समझ में न आए पर यह एक ऐसा आगमिक सच है जिसे नकारा नहीं जा सकता। इस आधार पर कहा जा सकता है कि संसार कभी व्यवहार राशि से शून्य नहीं होगा।

  7. प्रश्न 7. अव्यवहार राशि से जीवों का निर्यात होता रहता है तो क्या कभी ऐसा समय आ सकता है कि अव्यवहार राशि में एक भी जीव न रहे?

    अव्यवहार राशि में जीवों का अक्षय कोष है। इसमें इतने जीव हैं जिनका कभी अन्त आएगा ही नहीं।