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जैन धर्म परिचय

अन्य धर्मों से जैन धर्म की भिन्‍नता

1.सृष्‍टि निर्माता कोई ईश्‍वर विशेष नहीं है ।

2.संसार प्रवाह अनादि—अनन्त है ।

3.धर्म की आराधना में जात—पांत का भेद नहीं है ।

4.धर्म की आराधना में स्त्री और पुरुष को समान अधिकार है ।

5.मनुष्य अपने सुख—दुःख का स्वयं उत्तरदायी है ।

6.साधना के द्वारा प्रत्येक आत्मा ईश्‍वर बन सकती है ।

7.जैन दर्शन में एकेश्‍वरवाद के विपरीत अनेकेश्‍वरवाद की परम्परा है ।

8.सच्चा जैन अपने भगवान से कभी कुछ नहीं मांगता ।

9.भक्तिवाद के स्थान पर पुरुषार्थवाद की स्थापना ।

10.जैन राजाओं ने अपने शासनकाल में विधर्मी प्रजा को कभी नहीं सताया ।

11.जैन—अहिंसा अपने उपासकों को कर्तव्य पालन से कभी नहीं रोकती ।

12.मुख्य सिद्धान्त—समानता, आत्मानुशासन, आत्मनिर्णय का अधिकार, सापेक्षता, आत्मकर्तृत्व, अपरिग्रहवाद ।

13.साधना—समता, संयम, तपस्या और त्याग ।