सम्राट् भरत के सोलह स्वप्न
सम्राट भरत के सोलह स्वप्न
प्रथम स्वप्न—प्रभो ! मैंने पहाड़ पर चढ़ते हुए 23 सिंह देखे हैं ।
अर्थ—23 तीर्थंकरों के समय साधु धर्म में ढृढ़ रहेंगे । इसके बाद उनकी गूंज सुनाई देती रहेगी ।
दूसरा स्वप्न—एक सिंह देखा जिसके पीछे अनेक हिरण चल रहे थे ।
अर्थ—24वें तीर्थंकर भगवान के पीछे हिरण की तरह अनुयायी गमन करेंगे । पौरुष कम होगा । पदचिह्नों का अनुसरण करेंगे, परन्तु पालन क्षमता धीरे—धीरे घटती जाएगी ।
तीसरा स्वप्न—एक अश्व देखा, जो भार से दबा जा रहा था ।
अर्थ—अश्व मुनि का प्रतीक है । पांचवें आरे के मुनि शक्ति और सत्ता के प्रभाव से दबते जाएंगे ।
चौथा स्वप्न—बकरियों का समूह सूखी पत्तियां खा रहा था ।
अर्थ—अतिवृष्टि, अनावृष्टि के कारण पशु अभक्ष्य खाने लगेंगे, फलतः बकरी की तरह जानवर दुर्बल होंगे ।
पांचवां स्वप्न—हाथी की पीठ पर बन्दर को बैठे देखा ।
अर्थ—हाथी सत्ता का प्रतीक है । सत्ता निम्न वर्ग के लोगों के हाथ में चली जाएगी । क्षत्रिय कमजोर हो जाएंगे । सत्ताधारी छली, प्रपंची, चरित्रहीन होंगे ।
छठा स्वप्न—हंस को अनेक कौए मिलकर सता रहे हैं ।
अर्थ—जैन सन्तों को विरोधी—त्रास देंगे । झूठे आक्षेप लगाएंगे ।
सातवां स्वप्न—प्रेत घर—घर नाच रहा है । अर्थ—प्रेत—देवताओं की पूजा बढ़ेगी ।
आठवां स्वप्न—तालाब मध्य से सूखा और किनारा पानी से छलछलाता देखा ।
अर्थ—आर्यावर्त धर्म संस्कृति का केन्द्र है । वहां धर्म सूख जाएगा । उसके आस—पास के क्षेत्र धर्म केन्द्र रहेंगे ।
नवां स्वप्न—रत्नों का ढेर मिट्टी से ढका हुआ है ।
अर्थ—ज्ञान और श्रद्धारूपी रत्न अज्ञान और अश्रद्धा से दब जायेगा । साधुओं में धीरे—धीरे शुक्ल ध्यान नष्ट हो जाएगा ।
दसवां स्वप्न—कुत्ता मिठाई खा रहा है, लोग श्रद्धा से पूजा कर रहे हैं ।
अर्थ—अच्छे लोग सेवा करेंगे, नीच व्यक्ति उच्चता प्राप्त करेंगे ।
ग्यारहवां स्वप्न—जवान बैल तड़पता हुआ मेरे पास से निकला ।
अर्थ—युवक लोग जैन मुनि बनेंगे, परन्तु शिथिलाचार के कारण स्वयं बदनाम होंगे, जिन शासन को बदनाम करेंगे ।
बारहवां स्वप्न—दो बैलों को कन्धे से कन्धा मिलाकर जाते हुए देखा ।
अर्थ—धर्मप्रचार के लिए अकेला कोई साहस नहीं कर सकेगा ।
तेरहवां स्वप्न—चन्द्रमा पर धुंध छाई हुई देखी ।
अर्थ—आत्मा पर आवरण बढ़ेगा, धीरे—धीरे तत्त्वज्ञान नष्ट होगा ।
चौदहवां स्वप्न—सूर्य मेघ से ढका हुआ देखा ।
अर्थ—कोई सर्वज्ञ नहीं होगा ।
पन्द्रहवां स्वप्न—छाया हीन सूखा पेड़ देखा ।
अर्थ—धर्म का पेड़ तृष्णा के ताप से सूख जाएगा ।
सोलहवां स्वप्न—सूखे पत्तों का ढेर देखा ।
अर्थ—औषधि, जड़ी—बूटियां प्रभावहीन होंगी । वैद्य लोभी होंगे । रोग बढ़ेंगे ।