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जप साधना

ग्रह शान्ति के लिए तीर्थंकरों का जाप

तीर्थंकरों के नाम परम मांगलिक हैं । इनके जाप से शासन सेवक देव (यक्ष) और देवियां (यक्षिणी) प्रसन्‍न होते हैं । समय पर वे संकट निवारण के लिए साक्षात् उपस्थित भी होते हैं । प्रतिदिन प्रातः और सायं निम्‍नोक्त विधि से एक आसन में बैठकर जप करें—

मुख्य—मंत्र

सूर्य—ॐ ह्रीं श्रीं नमः पद्मप्रभवे, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

चन्‍द्र—ॐ ह्रीं श्रीं नमश्‍चन्‍द्रप्रभवे, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

मंगल—ॐ ह्रीं श्रीं नमो वासुपूज्यप्रभवे, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

बुध—ॐ ह्रीं श्रीं नमो शांतिनाथाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

बृहस्पति—ॐ ह्रीं श्रीं नमो ऋषभनाथाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

शुक्र—ॐ ह्रीं श्रीं नमो सुविधिनाथाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

शनि—ॐ ह्रीं श्रीं नमो मुनिसुव्रतनाथाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

राहु—ॐ ह्रीं श्रीं नमो नेमिनाथाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा

केतु—ॐ ह्रीं श्रीं नमो पार्श्‍वनाथाय, मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा