‹ जप साधना
जप-साधना विधि
1.जप अनुष्ठान के लिए ढृढ़ आस्था और आभ्यन्तर पवित्रता की अत्यन्त आवश्यकता है ।
2.जप काल में सीमित द्रव्य, एकासन, आयम्बिल, उपवास आदि आवश्यक होते हैं ।
3.मनःस्थैर्य के लिए नियत आसन में बैठकर (पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन) नासाग्र या भृकुटि पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए ।
4.जप काल में नियत समय (पश्चिम रात्रि, प्रातः शौचनिवृत्ति के बाद या पूर्व रात्रि) तथा नियत स्थान का भी अपना स्वतन्त्र महत्त्व है ।