उपयोगी जप मंत्र
1. विशेष मंत्र—
ॐ अ—सि—आ—उ—सा नमः ।
(यह नमस्कार मंत्र के पांचों पदों का बीज मंत्र है ।)
2. लोगस्स पाठ
इस पाटी में चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति है । इस पाटी का कम से कम 7 बार रात को सोते समय ध्यान करना चाहिए । इस मंगल मंत्र के ध्यान से स्वप्न नहीं आते । शासन—सेवक, सभी देव और देवियां इससे प्रसन्न रहते हैं । इसकी पूरी माला फेरी जाए तो विशेष लाभ होता है ।
(पाठ पृष्ठ 206 पर देखें)
3. पैंसठिया छन्द
यह प्रभावशाली मंत्र है । इसका मन में सदा ध्यान रखते हुए 7 बार, 11 बार या 21 बार जाप करना चाहिए ।
(छन्द पृष्ठ 59 पर देखें)
4. उपसर्गहर स्तोत्र
1. उवसग्गहरं पास, पासं वंदामि कम्मघणमुक्कं ।
विसहर—विसनिन्नासं, मंगल—कल्लाण—आवासं ।।1 ।।
2. विसहर—फुलिंग—मंतं, कंठे धारेइ जो सया मणुओ ।
तस्स गह—रोग—मारी, दुट्ठजरा जंति उवसामं ।।2 ।।
3. चिट्ठउ दूरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहुफलो होइ ।
नरतिरिएसु वि जीवा, पार्वति न दुक्ख—दोहग्गं ।।3 ।।
4. तुह सम्मत्ते लद्धे, चिंतामणि—कप्पपायवब्भहिए ।
पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरामरं ठाणं ।।4 ।।
5. इय संथुओ महायस ! भत्तिब्भर निब्भरेण हियएण ।
ता देव ! दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ।।5 ।।
यह भद्रबाहु स्वामी द्वारा रचित महाप्रभावक मंत्र है । इसकी साधना पौषबदी 10 से प्रारम्भ होती है । इसका बीज मंत्र है—
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं नमिऊण पास विसहर
वसह जिण फुलिंग ह्रीं श्रीं नमः ।
इसकी एक माला पद्मासन में बैठकर पूर्वोत्तर दिशा में फेरें फिर “उपसर्ग स्तोत्र’ का जितना पाठ हो सके, उतना पाठ करें । इसके बाद प्रतिदिन 27 बार रात को इसका जाप अनिवार्य है ।
5. पार्श्व—स्तुति मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री—चिन्तामणि—कामधेनु—कल्पवृक्ष पुरुषादानीय श्री पार्श्वनाथ—धरणेन्द्र—पद्मावती —सहिताय मम मनोवांछितं पूरय—पूरय जयविजय—करणाय नमः ।
(उपवास सहित पौषबदी 10 को यह जाप प्रारम्भ किया जाता है । फिर प्रतिदिन 27 बार जप करना चाहिए ।)
6. गौतम—स्तुति—(सुख—शान्तिवर्द्धक मंत्र)
ॐ नमो भगवतो गोयमस्स सिद्धस्स बुद्धस्स अक्खीण
महाणसस्स भगवन् ! मम मनोरथं पूरय—पूरय स्वाहा ।।
7. विघ्न निवारक मंत्र
नमिऊण असुरसुर—गरुल—भुयंगपरिवदिए गयकिलेसे ।
अरिहे सिद्धायरिए उवज्झाए सव्वसाहू य ।।
8. संकट निवारक मंत्र
ॐ—अ—भी—रा—शि—को—नमः
इस मंत्र की माला से भूत—प्रेत जनित कष्ट बहुत जल्दी दूर होते हैं । यह मंत्र आज भी अपना चमत्कार दिखाता है । इसमें पांच घोर तपस्वियों की स्तुति है—
1.अ—अमीचन्दजी स्वामी
2.भी—भीमराजजी स्वामी
3.रा—रामसुखजी स्वामी
4.शि—शिवजी स्वामी
5.को—कोदरजी स्वामी
9. चमत्कारी मंत्र—‘ॐ भिक्षु’
(यह मंत्र श्रद्धावान लोगों के लिए महामंत्र का कार्य करता है । इसका सवा लाख जाप करने से अवश्य चमत्कार होता है । प्रारम्भ भादवा सुदी तेरस या दीपावली से करें ।)
10. सुख शान्ति मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं अ—सि—आ—उ—सा सर्व—विघ्न—रोगोपद्रव
विनाशनाय मम ग्रहशान्तिं कुरु—कुरु स्वाहा ।।
(यह जाप सुबह शाम 27 बार करना चाहिये ।)
11. अहिंसा विकास मंत्र
धम्मो—मंगल—मुक्किट्ठं अहिंसा संजमो तवो ।
देवा वि तं नमसंति जस्स धम्मे सया मणो ।।
12. शान्तिस्तुति मंत्र
चइत्ता भारहे वासं चक्कवट्टी महिड्ढिओ ।
संती संतिकरे लोए, पत्तो गइमणुत्तरं ।।
13. ब्रह्मचर्य विकास मंत्र
देव—दाणव गंधव्वा, जक्ख—रक्खसकिन्नरा ।
बंभयारिं नमसंति, दुक्करं जे करंति तं ।।
14. कषाय विजय (आत्म—विजय) मंत्र
एगे जिए जिया पंच, पंच जिये जिया दस ।
दसहा हु जिणित्ताणं, सव्वसत्तू जिणामहं ।।
15. तनाव मुक्ति मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं भगवते पार्श्वनाथाय हर—हर स्वाहा ।
16. क्रोध आवेश—मुक्ति मंत्र
ॐ शान्ते प्रशान्ते सर्व—क्रोधोपशमनी स्वाहा ।
(21 बार)
17. भय मुक्ति मंत्र
णमो अभयदयाणं ।
(10 मिनट)
18. घुटन—मुक्ति मंत्र
अप्पणा सच्च मेसेज्जा मेत्तिं भूएसु कप्पए ।
(10 मिनट)
19. रोगनिवारक मंत्र
संती कुंथु अरहो, अरिट्ठनेमी जिणंदपासो य ।
समरंताणं णिच्चं, सव्वं रोगं पणासेइ ।।
20. प्रेमभाव वर्धक मंत्र
ॐ ह्रीं अर्हं णमो पदानुसारिणं
परस्पर—विरोध—विनाशनं भवतु ।
(प्रतिदिन 1 माला फेरें)
21. बुद्धि विकास मंत्र
ॐ णमो अरिहं वद—वद वाग्वादिनी स्वाहा ।
ॐ जय ॐ जय ॐ गुरुदेव,
मंगलकारी तुम स्वयमेव,
ॐ जय तुलसी तुलसी नाम,
ॐ श्रीं ह्रीं अर्हम् शुभ धाम,
ॐ श्रीं ह्रीं अर्हम् सुख धाम,
ॐ श्रीं ह्रीं अर्हम् शिव धाम ।।