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मंगल साधना

अनशन काल में ध्यान देने योग्य बातें

1.ग्रहण किए हुए व्रतों में जान या अनजान में हुई भूलों के लिए सरल भाव से आलोचना करना ।

2.साधु—साध्वियों के प्रति मानसिक, वाचिक एवं कायिक रूप में हुई आशातना के लिए क्षमा—याचना करना ।

3.चौरासी लाख जीवयोनि तथा जिनके साथ कटु व्यवहार हुआ हो उनसे व्यक्तिगत खमतखामणा करना । (खमाए बिना मरने वाला विराधक माना गया है ।)

4.प्राणातिपात (हिंसा—झूठ) आदि अठारह पापों का यथाशक्ति त्याग करना ।

5.देव, गुरु, धर्म रूप त्रिशरण को बार—बार दोहराना ।

6.अतीत जन्मों में कृत पापों की आलोचना करना ।

7.अपने द्वारा किये गए सुकृत कर्मों की अनुमोदना करना ।

8.सद्भाव एवं समता में रमण करना । अन्तिम समय की घोर वेदना में भगवान महावीर, राजर्षि सनत्कुमार, स्कन्दक, गजसुकुमाल आदि महात्माओं की सहनशीलता स्मरण करते हुए परिणामों को सुदृढ़ रखना ।

9.अनशन करने के बाद ‘नमस्कार महामन्त्र का जप तथा दस प्रकार की आराधना करते—करते समाधिमरण को प्राप्त करना ।