‹ मंगल साधना
गुरुदर्शन के पांच अभिगम
१. सचित्ताणं दव्वाणं विओसरणयाए
—सचित्त द्रव्यों को छोड़ना, जैसे पुष्प आदि।
२. अचित्ताणं दव्वाणं य विओसरणयाए
—अचित्त द्रव्यों को भी छोड़ना, जैसे छत्र, शस्त्र, जूते आदि।
३. एगसाडिएणं उत्तरासंगकरणेणं
—एक पटी चादर से उत्तरासंग करना।
४. चक्खुप्फासे अंजलिप्पग्गहेण
—गुरु के दृष्टिगोचर होते ही हाथ जोड़ना।
५. मणसो एगत्तीकरणेणं
—मन को उसी में एकाग्र करना।