मुख्य सामग्री पर जाएँ
मंगल साधना

प्रातः कालीन वन्दना

जीवन—धन तुम जीवन—दाता, कलाकार जीवन—निर्माता ।

श्रमण संस्कृति के उद्‍गाता, शरणागत के हो तुम त्राता ।।

तरुण तपस्वी, दीर्घ मनस्वी, तपःपूत विभुवर वर्चस्वी ।

ओजस्वी प्रभु परम यशस्वी, दिनमणि से अतिशय तेजस्वी ।।

विघ्‍न विनायक मंगल दायक, शान्ति विधायक जन उन्‍नायक ।

युग—युग जीओ शासन नायक, विश्‍व मैत्री के तुम संगायक ।।

(तर्ज : चौपाई)