वन्दना के कुछ दोष
1. अनादृत वन्दना :अनादर पूर्वक वन्दना करना ।
2. स्तब्ध वन्दना :अभिमान पूर्वक वन्दना करना ।
3. प्रदुष्ट वन्दना :जिसे वन्दना करते हैं, उसकी त्रुटि को ध्यान में रखते हुए घृणापूर्वक वन्दना करना ।
4. मत्स्य वन्दना :एक को वन्दना करके दूसरे को घूमते हुए वन्दना करना ।
5. गौरवनिमित्त वन्दना :लोग कहेंगे कि यह सामाचारी में कुशल है, इस प्रलोभन से वन्दना करना ।
6. चौर्य वन्दना :लोगों की दृष्टि चुराकर वन्दना करना या मेरा लाघव न हो, अतः चोर की तरह छुपकर वन्दना करना ।।
7. प्रत्यनीक वन्दना :आहारादि काल में वन्दना करना ।
8. मैत्री वन्दना :पूर्व सम्बन्ध तथा स्नेहवश वन्दना करना ।
9. दृष्टादृष्ट वन्दना :देखने पर वन्दना करना, दूरी या अन्धकार में नहीं करना ।
10. मूक वन्दना :बिना बोले वन्दना करना ।
11. ढड्ढ़र वन्दना :जोर से बोलते हुए वन्दना करना ।
12. वेदिकाबद्ध वन्दना :हाथों को जांघ या घुटनों के बीच रखकर वन्दना करना ।
13. करमोचन वन्दना :बंधन मानते हुए वन्दना करना ।