अनुप्रेक्षा : प्रायोगिक रूप
1. सत्य 2. मानवीय एकता 3. भेद—विज्ञान 4. मृदुता 5. मानसिक संतुलन 6. आत्मानुशासन 7. प्रामाणिकता 8. अनासक्ति 9. करुणा 10. शक्ति 11. अभय 12. ऋजुता 13. सहिष्णुता 14. मैत्री ।
1. सत्य की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.लयबद्ध दीर्घश्वास—5 मिनट
3.सूक्ष्म भस्त्रिका—4 मिनट
4.कायोत्सर्ग—5 मिनट
5.शान्ति केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
‘मैं सत्य के प्रति आस्थावान रहूंगा ।’
‘असत्य नहीं बोलूंगा । पूर्वाग्रह से बचूंगा ।’
इस शब्दावली की 12 मिनट तक पुनरावृत्ति करें । 4 मिनट उच्चारण पूर्वक, 4 मिनट मंद उच्चारण पूर्वक और 4 मिनट मानसिक अनुचिन्तन के रूप में ।
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
2. मानवीय एकता की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.लयबद्ध दीर्घश्वास—5 मिनट
3.सूक्ष्म भस्त्रिका—4 मिनट
4.कायोत्सर्ग—5 मिनट
5.विशुद्धि केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
मैं जाति, रंग आदि के आधार पर किसी को ऊंचा—नीचा नहीं मानूंगा ।
मैं मानवीय एकता में विश्वास करूंगा ।
इस शब्दावली की 12 मिनट तक पुनरावृत्ति करें । 4 मिनट उच्चारण पूर्वक, 4 मिनट मंद उच्चारण पूर्वक और 4 मिनट मानसिक अनुचिन्तन के रूप में ।
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
3. भेद विज्ञान की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.आनन्द केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित करें ।
4.पूरक के साथ ‘आत्मा भिन्न शरीर भिन्न’ इस पद की अनुप्रेक्षा करें । तीन मिनट उच्चारणपूर्वक ।
5.अनुचिन्तन करें—
शरीर परिग्रह है ।
जो व्यक्ति शरीर—मूर्च्छा या देहासक्ति को कम करता है, उसके कष्ट कम और दुःख स्वल्प हो जाते हैं ।
मैं भेद विज्ञान की साधना के द्वारा शरीर मूर्च्छा को कम करूंगा । (10 मिनट)
वह मूर्च्छा का मूल है ।
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
4. मृदुता की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.हरे रंग का श्वास लें । अनुभव करें चारों ओर हरे रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे हरे रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं ।
4.शान्ति केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें ।
मृदुता का भाव पु हो रहा है ।
अहं का भाव क्षीण हो रहा है ।
इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
व्यक्ति और वस्तु के प्रति मेरा व्यवहार विनम्र होना चाहिए ।
सत्य के प्रति विनम्र भाव जो मैं कहता हूं, वही सत्य है, इस आग्रह से बचने का मनोभाव ।
मुझे अपने अहं का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए ।
कृतज्ञता के लिए साधुवाद—धन्यवाद देना, सत्य की प्रवृत्ति का अनुमोदन करना, जीवन की सफलता का आवश्यक तत्त्व है ।
अपनी भूल के लिए खेद प्रकट करना, अप्रिय व्यवहार हो जाने पर क्षमायाचना करना, अपने आपको बड़ा बनाने का उपाय है ।
इन सबके प्रति मैं जागरुक बना रहूंगा—(2 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
5. मानसिक सन्तुलन की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.हरे रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर हर रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे हरे रंग के परमाणु श्वास से साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं । (5 मिनट)
4.दर्शन केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
आवेश अनुशासित हो रहा है ।
मानसिक सन्तुलन बढ़ रहा है । इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
अस्वस्थ मन शरीर को अस्वस्थ बनाता है ।
शारीरिक स्वास्थ्य के लिए मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है ।
अस्वाभाविक आकांक्षा, असहिष्णुता और अवांछनीय घुटन मन को असन्तुलित बना देती है ।
मानसिक असन्तुलन सफलता की बहुत बड़ी बाधा है ।
समस्या का सामना करना और मानसिक सन्तुलन खोना एक बात नहीं है ।
मैं अपने मन को इतना साध लूंगा कि प्रतिकूल परिस्थिति में भी वह सन्तुलित रह सके । (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
6. आत्मानुशासन की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.पीले रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर पीले रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे पीले रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं ।
4.शान्ति केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें ।
नियन्त्रण की क्षमता बढ़ रही है ।
मन की चंचलता कम हो रही है । इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
अनुशासन या नियन्त्रण के बिना समाज नहीं चल सकता ।
जब आत्म नियन्त्रण सशक्त होता है, तब बाहरी नियन्त्रण की अपेक्षा कम होती है ।
आत्म नियन्त्रण की शिथिलता होने पर बाहरी नियंत्रण की मात्रा बढ़ जाती है ।
मैं नहीं चाहता कि बाहरी नियन्त्रण के द्वारा मेरी स्वतन्त्रता पर अंकुश लगे ।
‘अपने से अपना अनुशासन, अणुव्रत की परिभाषा ।’ इस सत्य को मैंने समझा है, इसलिए मैं संकल्प करता हूं कि आत्मानुशासन का विकास करूंगा ।
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
7. प्रामाणिकता की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.सफेद रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर सफेद रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे सफेद रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं ।
4.ज्योति केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें ।
मेरी संकल्प शक्ति का विकास हो रहा है ।
प्रामाणिकता का भाव पुष्ट हो रहा है । इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
अप्रामाणिकता एक असाधारण आवेग है । यह बहुत बड़ी बुराई है ।
जो भावना से परिपक्व होता है, वही अप्रामाणिक व्यवहार करता है । • मैं अप्रामाणिकता की वृत्ति पर विजय पा सकता हूं ।
जिस क्षण अप्रामाणिक व्यवहार करने की बात मन में आयेगी, उसी क्षण मैं उसे बदलने का अभ्यास करूंगा ।
मैं अपने आपको भावित करता रहूंगा, कोई भी परिस्थिति मुझे अप्रामाणिक नहीं बना सकती । मैं अपने विवेक को काम में लूंगा ।
आवेश के आधार पर काम नहीं करूंगा ।।
मेरा ढृढ़ निश्चय है कि मैं निरंतर प्रामाणिकता का विकास करूंगा ।। (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
8. अनासक्ति की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.नीले रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर नीले रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे नीले रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं । (5 मिनट)
4.शान्ति केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें ।
अनासक्ति का विकास हो रहा है ।
पदार्थ के प्रति मूर्च्छा का भाव क्षीण हो रहा है ।
इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें ।
5.अनुचिन्तन करें—
मैं पदार्थ की प्रकृति को जानता हूं । वह मेरे लिए उपयोगी है । उससे मुझे सुविधा मिलती है, किन्तु सुख और शान्ति नहीं ।
सुख और शान्ति मेरे आंतरिक गुण हैं । मैं संकल्प करता हूं कि पदार्थ के प्रति मूर्च्छित नहीं बनूंगा । मैं सदा अपने प्रति जागरूक रहूंगा ।—(10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
9. करुणा की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.गुलाबी रंग का श्वास लें । अनुभव करें चारों ओर गुलाबी रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं ।
4.आनन्द केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
सम्यग् दॄष्टिकोण का विकास हो रहा है ।
करुणा का भाव पुष्ट हो रहा है । इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें ।
5.अनुचिन्तन करें—
क्रोध, अहंकार और लोभ के आवेग मनुष्य को क्रूर बनाते हैं ।
कोई नहीं चाहता कि मेरे साथ अप्रिय व्यवहार हो, फिर मुझे दूसरों के प्रति अप्रिय व्यवहार नहीं करना चाहिए । मुझे अच्छा जीवन जीने और सामुदायिक जीवन को शान्तिमय बनाने के लिए करुणा का विकास करना है ।
मैं संकल्प करता हूं कि मुझ में करुणा का भाव पुष्ट होगा— (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
10. शक्ति की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग —5 मिनट
3.अरुण रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर अरुण रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे अरुण रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं ।
4.फुफ्फुस पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
मेरी शक्ति का विकास हो रहा है ।
दुर्बलता क्षीण हो रही है ।
इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
आकांक्षा मन को दुर्बल बनाती है । दुर्बल मन में शक्ति का विकास नहीं होता । इसलिए आकांक्षा के चक्रजाल में नहीं फसूंगा ।
निःस्पृह भाव का विकास करूंगा ।
मनोबल बढ़ेगा, शक्ति जागृत होगी । (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
11. अभय की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.गुलाबी रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर गुलाबी रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे गुलाबी रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं—(5 मिनट) ।
4.आनन्द केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
अभय का भाव पुष्ट हो रहा है ।
भय का भाव क्षीण हो रहा है ।
इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
भय से विकसित शक्तियां कुण्ठित हो जाती हैं, नई शक्तियां विकसित नहीं हो पाती, इसलिए मुझे अभय होने का अभ्यास करना चाहिए ।
जो डरता है उसे सभी डराते हैं ।
भय आदमी को कमजोर बनाता है ।
कमजोर आदमी का कोई सहयोग नहीं करता ।
शक्ति के विकास के लिए अभय की साधना करूं, यह मेरा ढृढ़ निश्चय है ।
मैं निश्चित ही भय से छुटकारा पा लूंगा । (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
12. ऋजुता की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.अरुण रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर अरुण रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे अरुण रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं—(5 मिनट)
4.दर्शन केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
ऋजुता का भाव पुष्ट हो रहा है ।
वक्रता का भाव क्षीण हो रहा है । इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें । फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
ऋजुता और सत्य दोनों परस्पर जुड़े हुए हैं । जहां ऋजुता है, वहां सत्य है और जहां सत्य है, वहां ऋजुता है । ऋजुता को छोड़कर सत्य की कल्पना नहीं की जा सकती । ऋजु व्यक्ति ही अपने भावों को दूसरों तक पहुंचा सकता है और दूसरों के भावों को सम्यग् ग्रहण कर सकता है ।
ऋजु व्यक्ति ही कथनी और करनी की दूरी को कम कर सकता है ।
ऋजुता एक बहुत बड़ा मानवीय गुण है ।
मेरा संकल्प है कि मैं इसे अपने में विकसित करूंगा । (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
13. सहिष्णुता की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.नीले रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर नीले रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे नीले रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं —(5 मिनट)
4.ज्योति केन्द्र पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
सहिष्णुता का भाव पुष्ट हो रहा है ।
मानसिक सन्तुलन बढ़ रहा है ।
इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
शारीरिक संवेदन—
०ऋतु—जनित संवेदन
०रोग—जनित संवेदन
मानसिक संवेदन० सुख—दुःख—
०अनुकूलता—प्रतिकूलता
भावात्मक संवेदन—
०विरोधी विचार
०विरोधी स्वभाव
०विरोधी रुचि
ये तीनों प्रकार के संवेदन मुझे प्रभावित करते हैं । किन्तु इसके प्रभाव को कम करना है ।
यदि इनका प्रभाव बढ़ा तो शक्तियां क्षीण होंगी ।
जितना इनसे कम प्रभावित होऊंगा, उतनी ही मेरी शक्तियां बढ़ेगी । इस प्रकार सहिष्णुता का विकास करना मेरे जीवन की सफलता का महामन्त्र है । (10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)
14. मैत्री की अनुप्रेक्षा का प्रयोग
1.महाप्राण ध्वनि—2 मिनट
2.कायोत्सर्ग—5 मिनट
3.सफेद रंग का श्वास लें । अनुभव करें—चारों ओर सफेद रंग के परमाणु फैले हुए हैं । वे सफेद रंग के परमाणु श्वास के साथ भीतर प्रवेश कर रहे हैं ।—(5 मिनट)
4.पूरे ललाट पर चित्त को केन्द्रित कर अनुप्रेक्षा करें—
सब मेरे मित्र हैं ।
मैं सबके साथ मैत्री का प्रयोग करूंगा ।
इस शब्दावली का 9 बार उच्चारण करें, फिर इसका 9 बार मानसिक जप करें । (6 मिनट)
5.अनुचिन्तन करें—
शत्रुता का भाव भय पैदा करता है और भय शरीर एवं मन को दुर्बल बनाता है, इसलिए मुझे मैत्री भाव का विकास करना चाहिए ।
जैसे ही शत्रुता का भाव आता है, प्रसन्न्ता गायब हो जाती है ।
अपनी प्रसन्नता को सुरक्षित रखने के लिए मैत्री भाव का विकास करना चाहिए।—(10 मिनट)
6.महाप्राण ध्वनि के साथ प्रयोग सम्पन्न करें—(2 मिनट)