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प्रेक्षा और अनुप्रेक्षा

क्रोध के दुष्परिणाम

यकृत, तिल्ली और गुर्दे विकृत होते हैं ।

रक्तचाप बढ़ता, घटता है ।

आंतों में घाव होते हैं ।

पाचक रस अल्प मात्रा में बनता है ।

ज्ञान तन्तु कमजोर होते हैं ।

चित्त मलिन होता है ।