‹ श्रावक साधना
चार प्रकार के श्रावक
1.माता—पिता तुल्य—माता—पिता समान श्रमण—संघ का सदा हित चिन्तन तथा साधु—साध्वियों की निःस्वार्थ भाव से सेवा करने वाला ।
2.भाई तुल्य—आवश्यकता उत्पन्न होने पर आपत्ति काल में संघ सेवा का दायित्व बोध करने वाला ।
3.मित्र तुल्य—प्रीतिवश संघ की सेवा करने वाला ।
4.सौत तुल्य—साधु—सन्तों की कमियों को सदा देखते रहने वाला ।