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श्रावक साधना

दस प्रत्याख्यान विधि

1.नमस्कार सहिता—सूर्योदय के पश्‍चात् एक मुहूर्त तक कुछ नहीं खाना ।

2.पौरूषी—एक प्रहर दिन चढ़े तब तक कुछ नहीं खाना ।

3.पुरिमार्ध—आधे दिन तक कुछ नहीं खाना ।।

4.एकाशन—दिन में सिर्फ एक बार, एक जगह बैठकर एक घंटे से अधिक नहीं खाना ।।

5.एकल ठाणा—दिन में एक बार, एक जगह मौन पूर्वक एक घण्टे से अधिक नहीं खाना ।।

6.नीवी (निर्विगय)—एकाशन में दूध, दही आदि छ विगय का त्याग ।

7.आयंबिल—एक धान्य (अलूणा व लूखा) एक घंटे से अधिक बैठकर नहीं खाना ।

8.उपवास—तिविहार या चौविहार त्याग करना ।

9.अभिग्रह—अभिग्रह की अवधि सूर्योदय से 12 बजे तक है, तब तक न फले तो पारणा करने में आपत्ति नहीं ।

10.चरम प्रत्याख्यान—दिन अस्त होने के 48 मिनिट पूर्व खाने पीने का त्याग ।।

नोट : 1. नमस्कार सहिता 2. पौरूषी 3. पुरिमार्ध 4. चरम प्रत्याख्यान 5. अभिग्रह—ये पांच चौविहार किये जाये, शेष पांच तिविहार किये जा सकते हैं । श्रावक को वर्ष में एक बार दस प्रत्याख्यान अवश्य करने चाहिए ।