‹ श्रावक साधना
गुरु धारणा
अरहंतो महदेवो, जावज्जीवं सुसाहुणो गुरुणो ।
जिणपण्णत्तं तत्तं, इय सम्मत्तं मए गहियं ।।
मेरे धर्मदेव अरहंत भगवान महावीर स्वामी हैं ।
मेरे धर्मगुरु आचार्यश्री महाश्रमण हैं ।
मेरा धर्म जैन धर्म तेरापंथ है ।
मैं देव, गुरु और धर्म के प्रति ढृढ़ आस्था रखूंगा ।
मैं आत्म शुद्धि/जीवन—विकास के लिए निम्नांकित संकल्पों को स्वीकार करता हूँ—
1.मैं शराब, मांस और अण्डे का सेवन नहीं करूंगा ।
2.मैं नशा—मुक्त जीवन जीने का प्रयत्न करूंगा ।
3.मैं आवेशवश आत्म—हत्या नहीं करूंगा ।
4.पर—हत्या नहीं करूंगा ।
5.भ्रूण—हत्या नहीं करूंगा ।
6.मैं हरे—भरे बड़े वृक्ष जड़ से नहीं काटूंगा ।
7.मैं प्रतिदिन नमस्कार मंत्र की एक माला जपूंगा अथवा इक्कीस बार स्मरण करूंगा ।
8.मैं यथासंभव संवत्सरी का उपवास/व्रत करूंगा ।