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श्रावक साधना

सम्यक्त्व के लक्षण

सम्यक्त्व के पांच लक्षण हैं—

1.शम—क्रोध, आदि कषायों की शान्ति ।

2.संवेग—मोक्ष की अभिलाषा ।

3.निर्वेद—संसार से विरति ।

4.अनुकम्पा—प्राणीमात्र के प्रति दयाभाव ।

5.आस्तिक्य—आत्मा, कर्म आदि में विश्‍वास ।

सम्यक्त्व के पांच दूषण हैं—

1.शंका—तत्त्वों में सन्देह करना ।

2.कांक्षा—कुमत की वाञ्छा करना ।

3.विचिकित्सा—धर्म के फल में सन्देह करना ।

4.परपाषण्डप्रशंसा—मिथ्यादॄष्‍टि और व्रतभ्रष्‍ट पुरुषों की प्रशंसा करना ।

5.परपाषण्डपरिचय—मिथ्यादॄष्‍टि और व्रतभ्रष्‍ट पुरुषों का परिचय करना ।

सम्यक्त्व के पांच भूषण हैं—

1.स्थैर्य धर्म में स्थिर रहना ।।

2.प्रभावना—धर्म की महिमा बढ़ाना ।

3.भक्ति—भक्ति करना ।

4.कौशल—धर्म की जानकारी प्राप्त करना ।

5.तीर्थसेवा—साधु—संघ की उपासना करना ।