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श्रावक साधना

श्रावक के अभिनव तीन मनोरथ

1.कदा नु अहं आवेशमुक्तो भविष्यामि ।

—कब मैं आवेश—मुक्त बनूंगा/बनूंगी ।

2.कदा नु अहं अप्रामाणिकतामुक्तो भविष्यामि ।

—कब मैं अप्रामाणिकता मुक्त बनूंगा/बनूंगी ।

3.कदा नु अहं रूढ़िमुक्तो भविष्यामि ।

—कब मैं रूढ़ि—मुक्त बनूंगा/बनूंगी ।