‹ श्रावक साधना
श्रावक के तीन मनोरथ
1.कब मैं अल्पमूल्य एवं बहुमूल्य परिग्रह का प्रत्याख्यान करूंगा ।
2.कब मैं मुण्ड हो गृहस्थपन छोड़ साधुव्रत स्वीकार करूंगा ।
3.कब मैं अन्तिम समय में संलेखना व अनशन कर, मृत्यु की इच्छा न करता हुआ समाधि मरण को प्राप्त करूंगा ।