‹ श्रावक साधना
श्रावक की दैनिक जीवन चर्या
1.मैं मन की शान्ति के लिए प्रतिदिन प्रातः आसन, मंत्र—जाप और ध्यान का अभ्यास करूंगा ।
2.मैं प्रतिदिन पन्द्रह मिनट सत्साहित्य का स्वाध्याय करूंगा ।
3.मैं आत्म—तेज बढ़ाने के लिए प्रतिदिन एक घंटा मौन करूंगा ।
4.मैं सप्ताह में कम—से—कम एक बार सामूहिक प्रार्थना, सामायिक, सन्तदर्शन तथा गोष्ठी में भाग लूंगा ।
5.मैं प्रतिदिन सोते समय शुभ संकल्पों को दोहराऊंगा ।
6.गृहस्थ जीवन में पूरी प्रामाणिकता निभाई जा सकती है, इस पर मैं नित्य नये प्रयोग करूंगा ।
7.मेरे कारण कहीं परिवार में अशान्ति तो नहीं बढ़ रही है, प्रतिदिन इसका चिन्तन करूंगा ।
8.विसर्जन पद्धति से ममत्व का भाव घटता है, अतः विसर्जन करूंगा ।
प्रातः उठकर मैं करूं, महामंत्र का जाप ।
और करूं शुभ भावना, कट जाए सब पाप ।।