श्रावक निष्ठा-पत्र
तेरापंथ श्रावक संघ अनुशासन एवं समर्पण की दॄष्टि से एक अद्भुत धर्मसंघ है । आचार्य भिक्षु द्वारा की गयी मर्यादाएं उत्तरवर्ती आचार्यों द्वारा की गयी उनकी संपुष्टि तथा श्रमण संघ द्वारा की गयी अनुपालना उसका मुख्याधार रहा है । श्रावकों के लिए भी ऐसी कुछ मर्यादाओं की अपेक्षा लम्बे समय से अनुभव की जा रही थी । आचार्य भिक्षु के 180वें निर्वाणोत्सव के अवसर पर आचार्यश्री तुलसी द्वारा एक निष्ठा—पत्र प्रस्तुत किया गया, उससे एक चिर अपेक्षित आवश्यकता की संपूर्ति हुई है । उस निष्ठा—पत्र को यहां अविकल रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है—
1.मैं आचार्य भिक्षु की मर्यादा, तेरापंथ धर्म—शासन तथा शासनपति के प्रति समर्पित रहूंगा ।
2.मैं शासन की अखण्डता के लिए सतत जागरूक रहूंगा ।
दलबन्दी को प्रोत्साहन नहीं दूंगा ।।
3.मैं शासन से बहिर्भूत व्यक्ति (टालोकर) को प्रश्रय नहीं दूंगा ।
4.मैं आचार्य की आज्ञा के प्रतिकूल प्रवृत्ति को समर्थन नहीं दूंगा ।
5.मैं शासन के किसी साधु—साध्वी में दोष जान पड़े तो स्वयं उसे या आचार्य को जताऊंगा, प्रचारित नहीं करूंगा ।
6.मैं अपने खान—पान की शुद्धि को बनाये रखूंगा ।
7.मैं प्रतिदिन एक सामायिक या कम से कम 20 मिनट धर्मोपासना करूंगा ।
आचार्यश्री तुलसी