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तेरापंथ परिचय

आचार्य भिक्षु की धर्म-क्रांति के आधार

आचार्य भिक्षु स्थानकवासी समाज से अलग हुए, उसके प्रमुख कारण निम्‍नलिखित थे—

1.भगवान महावीर का वेश भी वन्दनीय है ।

2.इस समय शुद्ध साधुपन नहीं पाला जा सकता ।

3.व्रत और अव्रत को पृथक्—पृथक् न मानना ।

4.मिश्र धर्म की मान्यता—एक ही क्रिया में पुण्य और पाप दोनों को स्वीकारना ।

5.लौकिक दया और दान को लोकोत्तर दया और दान से पृथक् न मानना ।

6.जिस कार्य के लिए भगवान महावीर की आज्ञा नहीं है, वहां धर्म मानना ।

7.दोषपूर्ण आचार की स्थापना करना ।

8.स्थापित स्थान में रहना ।

9.उद्दिष्‍ट आहार लेना ।

10.साधु के निमित्त खरीदी वस्तुओं का उपयोग करना ।

11.नित्य—प्रति एक घर से भोजन लेना ।

12.वस्त्र—पात्र पुस्तक आदि का प्रतिलेखन न करना ।

13.अभिभावकों की आज्ञा प्राप्त किये बिना गृहस्थ को दीक्षित करना ।

14.मर्यादा से अधिक वस्त्र—पात्र रखना ।

15.गृहस्थों से अपने लिए प्रतियां लिखवाना ।