‹ तेरापंथ परिचय
आचार्य भिक्षु की शिक्षाएं और शासनाएं
1.मर्यादाएं हृदय को साक्षी बनाकर पालो ।
2.संकोचवश संघ में मत रहो ।
3.नियमानुवर्ती बनो । स्वेच्छाचारिता मत बरतो ।
4.आचार्य के कार्य में हस्तक्षेप मत करो ।
5.आचार से सम्बन्ध रखो, व्यक्ति से नहीं ।
6.किसी दोष को मत फैलाओ । सम्बन्धित व्यक्ति से या आचार्य से कहो ।।
7.बड़ों का सम्मान करो । छोटों के साथ वात्सल्य रखो ।
8.रोगी साधु—साध्वी की अग्लान और निःस्वार्थ भाव से सेवा करो । उसकी परिचर्या में न्यूनता मत लाओ ।
9.दलबन्दी मत करो ।
10.गण—गणी के सम्बन्धों को पुष्ट करो ।
11.सबको अपना—अपना संविभाग दो । अपने संविभाग से संतुष्ट रहो ।
12.पद की आकांक्षा मत करो ।।
13.निःस्वार्थ भाव से संघ की सेवा करो ।