नौ तत्त्व के ११५ भेद एक सौ पन्द्रह
नौ तत्त्वों के कुल एक सौ पन्द्रह भेद।
याद रखने के लिए यह पंक्ति सहायक हैजानूं जीव अजीव में, पुण्य पाप की बात। आश्रव संवर निर्जरा, बंध मोक्ष विख्यात॥
१. जीव के १४ भेद
सूक्ष्म एकेन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
बादर एकेन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
द्वीन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
त्रीन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
चतुरिन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
असंज्ञी-पँचेन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
संज्ञी-पँचेन्द्रिय के दो भेद
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
२. अजीव के १४ भेद
धर्मास्तिकाय के तीन भेद
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
अधर्मास्तिकाय के तीन भेद
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
आकाशास्तिकाय के तीन भेद
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
काल का एक भेद
- काल
पुद्गलास्तिकाय के चार भेद
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
- परमाणु
३. पुण्य के ९ भेद
- अन्न-पुण्य
- पान-पुण्य
- लयन (स्थान)-पुण्य
- शय्या-पुण्य
- वस्त्र-पुण्य
- मन-पुण्य
- वचन-पुण्य
- काय-पुण्य
- नमस्कार-पुण्य
४. पाप के १८ भेद
- प्राणातिपात पाप
- मृषावाद पाप
- अदत्तादान पाप
- मैथुन पाप
- परिग्रह पाप
- क्रोध पाप
- मान पाप
- माया पाप
- लोभ पाप
- राग पाप
- द्वेष पाप
- कलह पाप
- अभ्याख्यान पाप
- पैशुन्य पाप
- पर-परिवाद पाप
- रति-अरति पाप
- माया-मृषा पाप
- मिथ्यादर्शनशल्य पाप
५. आस्रव के २० भेद
- मिथ्यात्व आस्रव
- अव्रत आस्रव
- प्रमाद आस्रव
- कषाय आस्रव
- योग आस्रव
- प्राणातिपात आस्रव
- मृषावाद आस्रव
- अदत्तादान आस्रव
- मैथुन आस्रव
- परिग्रह आस्रव
- श्रोत्रेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- चक्षुरिन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- घ्राणेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- रसेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- स्पर्शनेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- मन-प्रवृत्ति आस्रव
- वचन-प्रवृत्ति आस्रव
- काय-प्रवृत्ति आस्रव
- भण्डोपकरण रखने में अयत्ना करना आस्रव
- शुचि-कुशाग्र मात्र दोष सेवन आस्रव
६. संवर के २० भेद
- सम्यक्त्व संवर
- व्रत संवर
- अप्रमाद संवर
- अकषाय संवर
- अयोग संवर
- प्राणातिपात विरमण संवर
- मृषावाद विरमण संवर
- अदत्तादान विरमण संवर
- अब्रह्मचर्य-विरमण संवर
- परिग्रह-विरमण संवर
- श्रोत्रेन्द्रिय-निग्रह संवर
- चक्षुरिन्द्रिय-निग्रह संवर
- घ्राणेन्द्रिय-निग्रह संवर
- रसनेन्द्रिय-निग्रह संवर
- स्पर्शनेन्द्रिय-निग्रह संवर
- मनो-निग्रह संवर
- वचन-निग्रह संवर
- काय-निग्रह संवर
- भण्डोपकरण रखने में अयत्ना न करना संवर
- शुचि-कुशाग्र मात्र दोष सेवन न करना संवर
७. निर्जरा के १२ भेद
- अनशन
- ऊनोदरी
- भिक्षाचारी
- रसपरित्याग
- काय-क्लेश
- प्रतिसंलीनता
- प्रायश्चित
- विनय
- वैय्यावृत्य
- स्वाध्याय
- ध्यान
- कायोत्सर्ग
८. बन्ध के ४ भेद
- प्रकृति-बन्ध
- स्थिति-बन्ध
- अनुभाग-बन्ध
- प्रदेश-बन्ध
९. मोक्ष के ४ भेद
- ज्ञान
- दर्शन
- चारित्र
- तप