ऋद्धि, मंत्र और यंत्र
श्लोक 1
ऋद्धि
ॐ ह्रीं अर्हं णमो अरिहंताणं
मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं नमः
विधि
प्रातः स्नान के पश्चात् शुद्ध वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। यंत्र को सम्मुख रखकर श्लोक का पाठ करें, फिर ऋद्धि-मंत्र का १०८ बार जाप करें।
फल
परंपरा के अनुसार भय-निवारण और चित्त की स्थिरता। यह विवरण प्राचीन ग्रंथों से संकलित है; किसी लाभ का दावा नहीं किया जाता।