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श्लोक 13

13

वक्त्रं क्व ते सुर-नरोरग-नेत्र-हारि निःशेष-निर्जित-जगत्-त्रितयोपमानम् । बिम्बं कलङ्क-मलिनं क्व निशाकरस्य यद्वासरे भवति पाण्डु-पलाश-कल्पम् ॥१३॥


देव, मनुष्य और नागों के नेत्रों को हरने वाला, तीनों जगत् की समस्त उपमाओं को जीत लेने वाला आपका मुख कहाँ, और कलंक से मलिन चन्द्रमा का बिम्ब कहाँ — जो दिन में पीले पलाश-पत्र के समान हो जाता है?

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