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श्लोक 22

22

स्त्रीणां शतानि शतशो जनयन्ति पुत्रान् नान्या सुतं त्वदुपमं जननी प्रसूता । सर्वा दिशो दधति भानि सहस्र-रश्मिं प्राच्येव दिग् जनयति स्फुरदंशु-जालम् ॥२२॥


सैकड़ों स्त्रियाँ सैकड़ों पुत्रों को जन्म देती हैं, किन्तु किसी अन्य माता ने आपके समान पुत्र को जन्म नहीं दिया। सभी दिशाएँ नक्षत्रों को धारण करती हैं, पर स्फुरित किरण-जाल वाले सहस्र-रश्मि सूर्य को पूर्व दिशा ही उत्पन्न करती है।

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