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श्लोक 24

24

त्वामव्ययं विभुमचिन्त्यमसंख्यमाद्यं ब्रह्माणमीश्वरमनन्तमनङ्ग-केतुम् । योगीश्वरं विदित-योगमनेकमेकं ज्ञान-स्वरूपममलं प्रवदन्ति सन्तः ॥२४॥


सन्त आपको अव्यय, विभु, अचिन्त्य, असंख्य, आदि, ब्रह्मा, ईश्वर, अनन्त, अनङ्ग-केतु, योगीश्वर, योग के ज्ञाता, अनेक तथा एक, और ज्ञान-स्वरूप निर्मल कहते हैं।

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